60 मीटर दूर से साधी निशाना, 14 साल की उम्र में हासिल की तीरंदाजी में बड़ी सफलता
बालोद में खुशी की लहर, गुरुकुल विद्यापीठ में 9वी कक्षा की है छात्रा
बालोद । एक बार फिर बालोद की बेटी फलक यादव ने तीरंदाजी में अपनी छाप छोड़ी है। उन्होंने 14 साल की उम्र में अपना पहला गोल्ड मेडल हासिल कर लिया है। दरअसल में 69 वा नेशनल स्कूल गेम के तहत तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन रांची झारखंड में हुआ। जिसमें अंदर 17 रिकार्व राउंड मिक्स टीम छत्तीसगढ़ की ओर से खेलते हुए फलक यादव और तरुण जांगड़े की जोड़ी ने गोल्ड मेडल प्राप्त कर लिया है। फलक ने 60 मीटर की दूरी से निशाना साधा और अपनी यह गोल्ड मैडम की उपलब्धि हासिल की। फलक यादव अपनी बड़ी बहन दक्षा यादव से प्रेरित होकर तीरंदाजी के क्षेत्र में आई है। जहां बड़ी बहन पहले दो नेशनल जीत चुकी है तो ही फलक का भी अब नेशनल रिकॉर्ड का खाता खुल गया है। बेटी की इस सफलता से बालोद शहर में जश्न का माहौल है। लोगों ने उनके पिता शशिकांत यादव निवासी शिकारीपारा बालोद सहित अन्य परिजनों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। फलक यादव गुरुकुल विद्यापीठ में कक्षा 9वी की छात्रा है जो वर्तमान में टाटा अकैडमी झारखंड में अभ्यासरत है। इस उपलब्धि पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश मुरारका भारतीय तीरंदाजी संघ और कोच जिला बालोद कुशल रजक ने भी फलक को बधाई देते हुए उनका हौसला बढ़ाया ।
टाटा आर्चरी अकैडमी जमशेदपुर के लिए छत्तीसगढ़ से चयनित होने वाली पहली खिलाड़ी भी है फलक
ज्ञात हो कि यादव परिवार की बेटी फलक यादव अब तीरंदाजी के क्षेत्र में आगे नेशनल के साथ-साथ ओलंपिक स्तर पर ट्रेनिंग लेने के लिए टाटा आर्चरी अकैडमी जमशेदपुर में अभ्यास कर रही है। इस अकादमी में प्रशिक्षण के लिए चयनित होने वाली वह छत्तीसगढ़ की पहली खिलाड़ी भी है। 14 साल की उम्र में ही उनकी तीरंदाजी में विशेष पहचान ने कई बेटियों और खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का काम किया है। पिता शशिकांत यादव ने बताया कि जमशेदपुर में लगभग 4 साल तक ट्रेनिंग सेंटर में फलक रहेगी । जहां उसे आगे नेशनल और ओलंपिक स्तर पर की प्रतियोगिता में शामिल होने के लायक तैयार किया जाएगा।
बेटियों की मां भी है प्रेरणा स्रोत
पिता शशिकांत ने बताया कि उनकी बेटियों को तीरंदाजी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका उनकी पत्नी माता निर्मला यादव का योगदान रहा है। जो स्वयं भी अपने दौर में खो खो और क्रिकेट की खिलाड़ी रह चुकी है। बहन दक्षा यादव भी नेशनल प्लेयर है। जिन्होंने 2018 और 2023 में पदक जीता है।
