पेरी अर्बन एवं अन्य ग्रामों से वर्ग मीटर दर की समाप्ति राज्य सरकार का अत्यंत जनहितैषी निर्णय,आम नागरिकों ने इसे भूमि मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं जनहितैषी बनाने हेतु महत्वपूर्ण बताया
बालोद- राज्य शासन के द्वारा पेरी अर्बन एवं अन्य ग्रामों में वर्ग मीटर दर समाप्त करने का निर्णय राज्य के छोटे भूखंड धारकों एवं जन सामान्य के लिए अत्यंत लाभप्रद एवं जनहितैषी निर्णय साबित हुआ है। राज्य शासन के इस नये निर्णय के फलस्वरूप पेरी अर्बन एवं अन्य ग्रामों से वर्ग मीटर दर समाप्त होने से अब आम नागरिकों को स्टाम्प एवं रजिस्ट्री शुल्क में सीधे लाभ मिल रहा है। जिससे संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य सहित बालोद जिले के छोटे भूखंड धारकों एवं आम नागरिकों में हर्ष व्याप्त है।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने भूमि मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पेरी अर्बन ग्राम तथा अन्य ग्रामों में लागू वर्ग मीटर दर को पूर्णतः समाप्त कर दिया है। पूर्व में ग्रामीण में 500 वर्ग मीटर तक की भूमि की मूल्यांकन वर्गमीटर दर के अनुसार की जाती थी परन्तु अब यह मूल्यांकन हेक्टेयर दर के अनुसार की जा रही है। यह निर्णय ग्रामीण एवं अर्द्ध शहरी क्षेत्र के नागरिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। राज्य शासन के इस निर्णय के फलस्वरूप वर्ग मीटर दर समाप्त होने से अब भूमि का मूल्यांकन वास्तविक और किफायती दरों पर होगा, जिससे रजिस्ट्री की कुल लागत कमी आएगी। इसी तरह वर्ग मीटर दर के कारण बढ़ी हुई कीमतों का बोझ हटने से आम नागरिकों पर सीधा आर्थिक लाभ पहुँचेगा। इसके अलावा किसानों, भू-धारकों और आम खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी। जिससे पारंपरिक एवं यथार्थवादी मूल्यांकन पद्धति से अनावश्यक अतिरिक्त खर्च अब नहीं लगेगा। शासन के इस नये निर्णय से रियल एस्टेट एवं विकास कार्यों को प्रोत्साहन मिलेगा। जिसके फलस्वरूप भूमि लागत कम होने से निवेश और निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। इसके साथ ही मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी होगा। जिससे नियमों की जटिलता कम होकर आमजन के लिए प्रक्रिया समझने और पूरा करने में आसानी होगी। राज्य शासन के इस निर्णय का प्रत्यक्ष लाभ समूचे छत्तीसगढ़ सहित बालोद जिले में भी देखने को मिला। जिला पंजीयक बालोद ने बताया कि उप पंजीयक कार्यालय बालोद में 09 अक्टूबर 2025 के पंजीकृत दस्तावेज के अनुसार ग्राम देवारभाट के 15 डिसमिल भूमि का पंजियन कराया गया जिसका पूर्वानुसार बाजार मूल्य 7,90,000 रूपये होता एवं इस पर स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क 74,900 देय होता, परन्तु वर्गमीटर दर समाप्त होने से उक्त भूमि का बाजार मूल्य 4,80,000 रूपये होता है। जिस पर पक्षकारों द्वारा स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क 45,500 चुकाया गया। जिससे पक्षकारों को सीधे 29,400 रूपये का लाभ प्राप्त हुआ है। राज्य शासन की इस नये निर्णय की सराहना करते हुए जिला मुख्यालय बालोद के ग्राम झलमला निवासी श्री खिलेश साहू एवं श्री उत्तम ठाकुर, ग्राम सोंहतरा निवासी श्रीमती हेमलता, ग्राम परसोदा निवासी श्री ओमप्रकाश शांडिल्य, ग्राम देउरतराई निवासी श्रीमती सुलोचना कंुजाम, ग्राम पलारी निवासी श्री मोतीराम साहू सहित अनेक छोटे भूखंडदारों एवं ग्रामीण जनों ने इसे भूमि मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से राज्य सरकार का यह कदम ग्रामीण एवं अर्द्ध शहरी जनता के हित में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय है। जिससे हजारों लोग सीधे लाभान्वित होंगे। सरकार का लक्ष्य भूमि एवं आवास से जुड़ी प्रक्रियाओं को सुलभए किफायती और जनकल्याणकारी बनाना है. और यह सुधार उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
नये नियम के फलस्वरूप स्टाम्प एवं रजिस्ट्री शुल्क में सीधे लाभ होने से छोटे भूखंड धारक एवं आम नागरिकों में हर्ष व्याप्त
