बालोद/ रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट फ़ार्मेसी कौंसिल में व्याप्त अनियमितताओ को सुधारने पुनः एक बार इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन (IPA) द्वारा वर्तमान रजिस्ट्रार को ज्ञापन दिया गया है ।

दस बिंदुओं में सौंपें गये ज्ञापन में अनुभव आधारित पंजीयनों की जाँच , लाइफ टाइम पंजीयन को ख़त्म करना ताकि 4000 अवैध पंजीयनों की जाँच हो सके, मेडिकलों में फ़ार्मासिस्ट की उपस्थिति जाँचने फ़ार्मेसी इंस्पेक्टर की नियुक्ति, पंजीयन को पूर्णतः ऑनलाइन करना, कौंसिल ऑफिस की स्वयं की बिल्डिंग निर्माण, एवम फ़ार्मेसी पेशे के नियमों का कड़ाई से पालन करवाने की माँग की गई है।इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन छत्तीसगढ़ स्टेट ब्रांच सचिव राहुल वर्मा ने कहा
कि छत्तीसगढ़ गठन के 23 सालों बाद भी फ़ार्मेसी एक्ट 1948 , फ़ार्मेसी प्रेक्टिश रेगुलेशन 2015 का धरातल में कोई औचित्य नहीं है । इसका प्रमुख कारण कौंसिल चुनाव में अनुभव आधारित फार्मासिस्टों का जितना और सदस्य बनना है । अनुभव आधारित फार्मासिस्ट के पास फ़ार्मेसी की डिग्री या डिप्लोमा नहीं है ये मुख्यतः केमिस्ट हैं जिन्होंने पुरानी व्यवस्था के आधार पर पंजीयन करवा रखा है और बिना कोई नवीनीकरण के या बिना कोई वैध दस्तावेजों के पीढ़ी दर पीढ़ी व्यापार करते आ रहें हैं । ये नहीं चाहते की छत्तीसगढ़ में फ़ार्मेसी एक्ट का पालन हो और पढ़े लिखे फार्मासिस्टों का भला हो । इसके पीछे मुख्य कारण है व्यापार । ये अनुभव आधारित फार्मासिस्ट मुख्यतः होलसेल दवा व्यापारी हैं जो चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ में ज़्यादा से ज़्यादा मेडिकल स्टोर खुले । ये ग़ैर क़ानूनी रूप से झोला छाप प्रेक्टिसनर को भी अंग्रेज़ी दवा बेचते हैं । ये अनुभव आधारित फ़ार्मासिस्ट ज़्यादा मेडिकल खुलवाने के चक्कर में नियमों का उनलघन करते हैं गाँव-गाँव में किराना व्यापारियों को ड्रग लाइसेंस बनवाने में मदद करते हैं । किराए में फार्मासिस्ट की डिग्री उपलब्ध करवाते हैं और ड्रग इंस्पेक्टर को नियम विरुद्ध लाइसेंस बनाने राजनीतिक दबाव बनाते हैं उन्हें ट्रांसफ़र करवाने यहाँ तक की जान से मरवाने की भी धमकी देते हैं । यह सब हो रहा आपके छत्तीसगढ़ में इसीलिये पढ़े लिखे फार्मासिस्टों को आईपीए का साथ देना होगा ताकि संगठन सुधारात्मक गतिविधि को जल्दी कर सके ।
विचार कीजिए और साथ दीजिए
जल्दी ही बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू करेंगे ।
