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“बेटी है तो कल है” और “करबो मतदान” की थीम पर मिट्टी के दीयों से रोशन हुआ जगन्नाथपुर

यादव परिवार की पहल चौथे साल भी कायम, बेटी बेटा में फर्क दूर करने करते हैं दिवाली पर प्रयास

बालोद। ग्राम जगन्नाथपुर में चौथे वर्ष भी यादव परिवार द्वारा “बेटी है तो कल है” की थीम पर दिवाली मनाई गई। इस महीने विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं। जिसे देखते हुए “करबो मतदान” की थीम पर भी अलग से रंगोली सजाकर और मिट्टी के दीप जलाकर लोगों को 100% मतदान के लिए प्रेरित भी किया गया। ज्ञात हो कि समाज में बेटी बेटा के प्रति फर्क दूर करने और नजरिया बदलने की कोशिश करते हुए यादव परिवार के द्वारा हर साल इस तरह से दिवाली मनाई जाती है। जिसके तहत उक्त परिवार के सदस्यों द्वारा लोगों को घर-घर जाकर पांच-पांच मिट्टी के दीपक वितरित किए जाते हैं। और घर आंगन में रंगोली सजाकर “बेटी है तो कल है” की थीम का संदेश दिया जाता है। इस अभियान की प्रेरणा स्रोत 4 साल की बच्ची वैष्णवी रानी यादव है। जब वह पैदा हुई तो उसे लक्ष्मी स्वरूप मानकर माता-पिता ने अस्पताल से घर आने पर दीप जलाकर आरती उतार कर सत्कार किया था। तब से उन्होंने खासतौर से बेटियों को बढ़ावा देने की मुहिम शुरू की। इस परिवार के मुखिया मधु यादव का कहना है कि बेटी बेटा में कोई अंतर नहीं है। पर कुछ जगह यह देखने में आता है कि लोग बेटा पैदा होने पर ज्यादा खुशी मनाते हैं पर बेटियों पर नहीं। यह अंतर दूर करने का प्रयास हम कर रहे हैं। ताकि लोग दोनों में समानता लाए उन्होंने कहा कि बेटियां दो कुल का नाम रोशन करती है।

वैष्णवी के पिता दीपक यादव, माता माधुरी यादव ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो पढ़े लिखे होकर भी बेटी बेटा में फर्क करते हैं। इस सोच को बदलने का एक छोटा सा प्रयास हम कर रहे हैं और लक्ष्मी पूजन के दिन बेटियों के सम्मान में “बेटी है तो कल है” की थीम के साथ दीपावली मनाते हैं। पहल का यह चौथा वर्ष है।

जगन्नाथपुर के आबादी पारा में आंगन पर “बेटी है तो कल है” और “करबो मतदान” की थीम के साथ रंगोली सजाकर सैकड़ो दीप जलाए गए। सभी ने शत प्रतिशत मतदान करने का संकल्प भी लिया।

इस अवसर पर वरिष्ठ ग्रामीण तीयारी राम ठाकुर, भेलिया बाई, उमठी विश्वकर्मा, रुक्मणी, सुरेश, बिरेंद्र विश्वकर्मा, दीपिका, विजय यादव, आफिया, अहीर खान, चंद्रकला, राकेश, बद्रीनाथ, दुर्गा, भुनेश्वर साहू सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

सरपंच ने कहा गांव का बढ़ रहा मान

सरपंच अरुण साहू ने कहा कि यादव परिवार की इस पहल से दिवाली पर गांव का मन बढ़ता है। बेटी बेटा में समानता लाने की उनकी कोशिश अच्छी है। इससे दूसरों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए और बेटियों के प्रति नजरिया बदलना चाहिए।

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