खबर का असर:गुंडरदेही के सुमन पब्लिक स्कूल प्राचार्य की मनमानी पर प्रशासन ने कसा शिंकजा, छात्र के चरित्र प्रमाण पत्र को “सामान्य” के स्थान पर “अच्छा” करना पड़ा जारी



बारहवीं पास के बाद छात्र कालेज में एडमिशन से हो रहा था वंचित, अब मिलेगी राहत

बालोद। गुण्डरदेही में संचालित प्राइवेट हायर सेकेंडरी स्कूल (सुमन स्कूल) में एक छात्र आदित्य बारले निवासी रूदा के स्थानांतरण प्रमाण पत्र में स्कूल प्रबंधन द्वारा चरित्र को “सामान्य” लिखे जाने के चलते उसे आगामी कॉलेज में एडमिशन से वंचित होना पड़ रहा था।
इस संबंध में हमने कल प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। मामले में छात्र ने शिक्षा विभाग गुंडरदेही बीईओ से शिकायत भी की थी। मामला प्रकाश में आने के बाद इस पर कलेक्टर कुलदीप शर्मा सहित डीईओ बालोद ने तत्काल कार्यवाही की और स्कूल प्रबंधन को फटकार लगाते हुए संबंधित छात्र का नया चरित्र प्रमाण पत्र जारी किया गया। जहां उनके व्यवहार को लेकर “सामान्य” शब्द को हटाकर “अच्छा” लिखा गया. छात्र को जारी इस नए चरित्र प्रमाण पत्र से अब उन्हें आगे एडमिशन में सुविधा मिलेगी। साथ ही उनके कैरियर को लेकर जो संशय की स्थिति बन रही थी वह भी अब दूर हो जाएगा। वहीं प्रशासन द्वारा इस मामले में त्वरित कार्यवाही को लेकर छात्र ने आभार जताया। वही मीडिया को भी धन्यवाद ज्ञापित किया है। वही यह खबर निजी स्कूल प्रबंधन की मनमानी पर भी एक सवाल उठाता है कि अगर कोई छात्र किसी आर्थिक दिक्कत के चलते अगर फीस नहीं दे पा रहा है तो क्या उसके रिजल्ट या प्रमाण पत्र के साथ इस तरह से खिलवाड़ करना उचित है? ऐसे और भी कई जिले में प्राइवेट स्कूल है जहां इस तरह की मनमानी होती रहती है। लेकिन छात्र अपने कैरियर को लेकर चिंतित रहते हैं। इस वजह से आवाज नहीं उठा पाते हैं। लेकिन आदित्य बारले जैसे छात्र ने आवाज उठाकर इस तरह की मनमानी को रोकने का एक प्रयास किया है। वहीं सूत्रों के मुताबिक उक्त सुमन हायर सेकेंडरी स्कूल ये एक ही मामला नहीं है। एक और मामले की शिकायत सामने आई है। जिसमें एक छात्रा द्वारा स्कूल प्रबंधन के खिलाफ शिक्षा विभाग में शिकायत की गई है कि उनका भी रिजल्ट कई सालों से रोक दिया गया है। उन्हे अब तक कोई मार्कशीट नहीं मिली है। इस संबंध में भी अगर यथाशीघ्र स्कूल प्रबंधन द्वारा पहल नहीं की जाती है तो मीडिया उसे भी उजागर करेगी और पीड़ित छात्रा को न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

क्या था आदित्य का मामला

स्कूल से छात्र को पहले को चरित्र प्रमाण पत्र मिला था उसमें सामान्य उल्लेख था। जबकि “अच्छा” उल्लेख होना चाहिए। वरना एडमिशन नहीं हो पाता. कॉलेज द्वारा लौटाए जाने पर छात्र जब दोबारा स्कूल गया तो उन्हें बकाया फीस ₹1000 देने के लिए दबाव बनाया गया. जब छात्र ने अपनी आर्थिक स्थिति बयां की और कहा कि मुझे एक हफ्ते की मोहलत दे दीजिए जो भी फीस बकाया है उसे दे दूंगा। तो फिर प्रमाण पत्र को बिना सुधार के ही लौटा दिया गया मामले में फिर छात्र ने वकील के जरिए शिक्षा विभाग गुंडरदेही कार्यालय में जाकर लिखित शिकायत की और प्रबंधन पर कार्यवाही की मांग की ताकि इस तरह किसी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना किया जाए। मामले को संज्ञान में लेते हुए एबीईओ के द्वारा स्कूल प्रबंधन को फोन पर बात करके कहा कि इसमें सुधार कर दीजिए । एबीईओ से बातचीत होने के बाद दोबारा छात्र स्कूल में गया तो वहां की प्राचार्य द्वारा उनके साथ धमकी पूर्ण तरीके से बात करते हुए कहा गया कि तुमने मेरी शिकायत की है। अब तो तुम्हारा कैरियर खत्म करके रहूंगी और तुम्हारा एडमिशन कहीं होने नहीं दूंगी। अगर होता भी है तो उसे रुकवा दूंगी। इस तरह की बातें कह कर प्राचार्य निशा साहू द्वारा छात्र को डराया, धमकाया गया। जिससे छात्र अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित हो गया। प्राचार्या के द्वारा दिए जा रहे इस धमकी के फलस्वरूप दोबारा छात्र ने अपने वकील के जरिए शिक्षा विभाग में शिकायत की है। उक्त प्राचार्य के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। साथ ही प्रमाण पत्र में चरित्र संबंधित उल्लेख को सुधारने की मांग की ।

प्राचार्य की दबंगई पूर्ण रवैया में प्रमाण पत्र लेने स्कूल नहीं जा पा रहा छात्र

वही भले ही स्कूल प्रबंधन द्वारा उनका प्रमाण पत्र सुधार दिया गया है। लेकिन प्राचार्य द्वारा जिस तरह से धमकी दी गई है उससे छात्र में एक डर सा बैठा हुआ है। जिसके चलते वह स्कूल में प्रमाण पत्र लेने के लिए नहीं जा पा रहा है। उन्होंने मांग की है कि उनके साथ स्थानीय शिक्षा विभाग से कोई भी कर्मचारी जाए और उनकी मौजूदगी में प्रमाण पत्र ले। ताकि फिर कोई धमकी या किसी तरह का विवाद खड़ा ना हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page