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शिक्षा में सामुदायिक सहभागिता के लिए जिलाधीश लेंगे 29 को उद्योगपतियों की बैठक, विद्यांजलि 2.0 अंतर्गत प्रेरित किया जाएगा

बालोद। सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने में अब सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि हर कोई अपने तरीके से योगदान दे सकेगा। ये योगदान बच्चों को पढ़ाने लिखाने से लेकर उनके खाने-पीने से जुड़ी सुविधाओं को जुटाने व स्कूल के इन्फ्रास्ट्रक्चर संसाधन आदि से जुड़ेगे यह बात विद्यांजलि के संबंध में बताते हुए जिला के जिला शिक्षा अधिकारी पीकेएस बघेल ने दी।
जिला मिशन समन्वयक अनुराग त्रिवेदी ने कहा कि स्कूलों में अब विद्या के मंदिर में दान के इच्छुक दानदाताओं के सहयोग से शिक्षा के स्तर में सुधार लाने हेतु सहभागिता मिलेगी
इस हेतु कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक जन्मेजय महोबे की उपस्थिति में जिले के स्वयंसेवी संस्था उद्योगपति आदि के साथ दिनांक 29 मार्च 2022 दिन मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में समय 1:00 बजे से बैठक आयोजित किया गया है।
उक्त बैठक के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए जिला परियोजना कार्यालय के एपीसी सी बी साहू जिला प्रभारी विद्यांजलि कार्यक्रम ने कहा कि प्राचीन समय से ही मानव समाज में शिक्षा के प्रति समर्पण की भावना रहा है और लोग मांगने से पहले शिक्षा के उत्तरोत्तर विकास हेतु शिक्षा एवं संसाधनों के रूप में सहभागिता प्रदान करते हैं इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर केंद्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से प्रारंभ किए गए विद्यांजलि योजना से अब समाज को विद्यालय के साथ जोड़ा जा रहा है।
वालंटियर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य

विद्यांजलि 2.0 कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी रघुनंदन गंगबोईर व्याख्याता शासकीय हाई स्कूल जमरूवा ने बताया कि
विद्यांजलि 2.0 के तहत दानकर्ता और सेवा प्रदाता का किया जाएगा पंजीकरण । दानकर्ता और सेवा प्रदाता को भी वालंटियर रजिस्ट्रेशन साइट www.vidhyanjali.gov.in
में पंजीकृत करना है। इसके लिए कम्युनिटी बेस्ड आर्गेनाइजेशन, गैर सरकारी संस्थान, अनिवासी भारतीय, कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी को भी स्वैच्छिक समर्थन के लिए प्रोत्साहित करना है। संपत्ति-सामग्री का दान के रूप में असैनिक कार्य, इलेक्ट्रिकल, डिजिटल सह शैक्षणिक गतिविधि के उपकरण, खेलकूद, योग, स्वास्थ्य व सुरक्षा सामग्री, शिक्षण अधिगम सामग्री, मरम्मत, कार्यालय स्टेशनरी, फर्नीचर आदि की आवश्यकता को भी विद्यालय की ओर से अपलोड को मदद दी जाएगी।यदि वह इन स्कूलों में कुछ समय के लिए पढ़ाना चाहता है या बच्चों को किसी खेल या विशेष हुनर से प्रशिक्षित करना चाहता है, तो वह भी कर सकता है। इसके लिए उन्हें स्कूल को पहले बताना होगा। वहीं स्कूलों की ओर से भी समय-समय पर अपनी जरूरतों का ब्योरा आनलाइन मुहैया कराया जाएगा। जिसके आधार पर कोई भी उन्हें संबंधित योगदान दे सकेगा। फिलहाल इस पूरी कवायद के पीछे शिक्षा मंत्रालय का जो मुख्य मकसद है, वह सरकारी स्कूलों के प्रति आम लोगों में भरोसा जगाना है।
उक्त बैठक में जिले के स्वयंसेवी संस्था एवं उद्योगपतियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील जिला परियोजना कार्यालय एवं मिशन समन्वयक कार्यालय की ओर से की गई है।

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