जन सेवक राकेश यादव ने की सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षा पद्धति की सराहना, कहा : सनातन संस्कृति को बचाने और पुनर्निर्माण का जरिया है यह विद्यालय



सरकार से स्कूल हेतु दो कमरों के भवन के लिए 10 लाख दिलाने की हुई घोषणा

जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने भी कहा : शौचालय निर्माण के लिए देंगे अपनी निधि से 2 लाख

सरस्वती शिशु मंदिर जगन्नाथपुर में हुआ बसंत पंचमी और वार्षिकोत्सव का भव्य आयोजन

बालोद। बालोद जिले के सरस्वती शिशु मंदिर पूर्व माध्यमिक विद्यालय जगन्नाथपुर में शुक्रवार को बसंत पंचमी और वार्षिक उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। सुबह से देर शाम तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण जन मौजूद रहे। बच्चों के पालकों ने पूरे आयोजन का लुफ्त उठाया। आयोजन के शुभारंभ के मुख्य अतिथि पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और जनसेवक बालोद से राकेश यादव पहुंचे हुए थे।

जिन्होंने आयोजन की काफी सराहना की। साथ ही सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षण पद्धति को लेकर भी उन्होंने कहा कि यहां शिक्षा के साथ-साथ संस्कार मिलता है। सनातन संस्कृति को बचाने, नए भारत के पुनर्निर्माण , बच्चों में हमारी संस्कृति के संरक्षण और संस्कार के बीज बोने का काम यहां होता है। इन्हीं विद्यालयों की वजह से आज हमारे देश में भावी पीढ़ी हमारी भारतीय संस्कृति का महत्व समझेगी। उन्होंने कहा कि बहुत ही अल्प मानदेय पर ऐसे विद्यालय के आचार्य और दीदियां सेवा भाव से बच्चों को पढ़ाते हैं। जहां सरकारी स्कूल के एक शिक्षक का वेतन जितना होता है उतना वेतन सरस्वती शिशु मंदिर के पांच शिक्षकों का भी मिला दे तो भी नहीं होता। उन्होंने कहा कि समय-समय पर मेरा सहयोग सरस्वती शिशु मंदिर जगन्नाथपुर को मिलता रहा है। पूर्व में हमने यहां टीन शेड लगवाया है। साथ ही प्रधानाचार्य ताराचंद साहू और सिद्धिविनायक शिक्षण समिति के सचिव खिलानंद गिलहरा के प्रतिवेदन को सुनकर उन्होंने शासन से सरस्वती शिशु मंदिर जगन्नाथपुर में अतिरिक्त दो कमरा निर्माण के लिए 10 लाख दिलाने की घोषणा की। इस दौरान अध्यक्षता कर रहे जिला पंचायत उपाध्यक्ष व रेडक्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष तोमन साहू ने भी शिशु मंदिर के शिक्षण पद्धति की तारीफ करते हुए कहा कि यदि किसी समाज और देश की शिक्षा व्यवस्था मजबूत ना हो तो वह देश गुलाम बन जाता है। अंग्रेजों ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को ही कमजोर कर हमें गुलाम बनाया था। जगन्नाथपुर के इस स्कूल में अभाव में भी प्रतिभा निकल कर सामने आ रही है। उन्होंने पालकों से भी अपील किया कि स्कूल के संचालन में ज्यादा से ज्यादा योगदान दे। उन्होंने अपनी निधि से शौचालय बनवाने के लिए दो लाख देने की घोषणा की। साथ ही कहा कि हम संगठन स्तर पर जिले की शिशु मंदिरों के बारे में चिंतन करते हैं। वहां के मूलभूत सुविधाओं को लेकर हम तत्पर रहते हैं कि कहां क्या समस्या है उसका समाधान करें। विशेष अतिथि जनपद सदस्य दमयंती हरदेल ने कहा कि कम पैसे में भी यहां बेहतर शिक्षा बच्चों को मिलती है। बच्चे यहां के संस्कारवान और अनुशासन में होते हैं। सदगुण, सद्भावना, शिष्टाचार यहां के बच्चों भरी होती है। हमारे आचार्य दीदी बहुत अच्छी तरह से पढ़ाई कराते हैं। बच्चों की नींव मां-बाप के साथ-साथ शिक्षकों के ऊपर भी रहता है। शिक्षकों का यह दायित्व होता है कि वह बच्चों के भविष्य का नींव मजबूत करें और सरस्वती शिशु मंदिर जगन्नाथपुर में ये काम बखूबी किया जा रहा है। अतिथियों ने पंचायत प्रतिनिधियों को भी आश्वस्त किया कि ग्राम जगन्नाथपुर के विकास के लिए भी हम राशि की कमी नहीं होने देंगे। यहां जो जो ज़रूरतें हैं, उनके प्रस्ताव क्रमशः भेज कर स्वीकृति दिलाएंगे।

नवदुर्गा की झांकी प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोहा

इस दौरान आमंत्रित अतिथियों को स्मृति चिन्ह, शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने आकर्षक छत्तीसगढ़ी लोकगीतों पर नृत्य प्रस्तुति दी। इस बीच नवदुर्गा की झांकी की प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरी। साथ ही अरुण उदय के छोटे बच्चों की नटखट प्रस्तुति ने भी सबको गुदगुदाया। विवाह की प्राचीन पद्धति को जीवंत रखने के लिए दी गई पूरे रस्मो की नृत्य गीत की विशेष प्रस्तुति ने भी लोगों को बदलते प्रवेश में संस्कृति बचाने का संदेश दिया। देर शाम तक कार्यक्रम चलता रहा। इस अवसर पर अन्य अतिथियों में जुंगेरा भाजपा मंडल ग्रामीण के अध्यक्ष अरुण साहू, जगन्नाथपुर सरपंच देव कुंवर कोसिमा, परसदा सरपंच राजू लाल आर्य, नरेंद्र सिन्हा, सीआर साहू, जीआर दीपक, शिवेंद्र देशमुख, उप सरपंच मनोज सुकतेल सहित जगन्नाथपुर के अन्य पंचगण, समापन के मुख्य अतिथि सरस्वती शिशु मंदिर संस्थान के जिला समन्वयक दीपक हिरवानी, सिद्धिविनायक शिक्षण समिति के अध्यक्ष एस सी हरदेल , राजेंद्र जेठमल, कोमिन साहू, अभ्यास साहू, ओमप्रकाश देशमुख, कमलेश्वरी चुरेंद्र, यशवंत गायकवाड, दरबारी सिन्हा, भूपत बघेल, दीपक यादव मौजूद थे। आयोजन में आचार्य रेख लाल देशमुख, राजेंद्र खरे, खेमिन साहू, धनंजय साहू, भावना सुनहरे, रीना देशलहरे, चैन कुमारी नेताम, माधुरी यादव, लक्ष्मी साहू, हरीश साहू, त्रिवेणी दुबे, किरण यादव, नूमेश्वरी विश्वकर्मा आदि का सहयोग रहा।।

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