भक्ति से अवगुणों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है



बालोद– ग्राम तमोरा सुर्रा में शिव महापुराण का तीसरा दिन पंडित आकाश कृष्ण शास्त्री जी बताया गया कि नारद का काम (जैसा कि ‘विजय’ और ‘यज्ञदत्त के पुत्र गुणनिधि’ के प्रसंगों में आता है) भगवान का गुणगान करना और भक्ति का प्रचार करना है, जबकि गुणनिधि का चरित्र पहले अवगुणों से भरा था, जो बुरी संगत में पड़कर भटक गया, पर अंत में शिव कृपा से उसे सद्गति मिली, जो भक्ति की शक्ति को दर्शाता है। नारद, भगवान के मन के रूप में, भक्ति के मार्ग को दिखाते हैं, और गुणनिधि की कहानी बताती है कि कैसे एक पथभ्रष्ट व्यक्ति भी प्रेम और निष्ठा से उद्धार पा सकता है, भले ही उसका नाम ‘गुणनिधि’ हो पर उसमें गुण न हों।
नारद का कार्य:
भक्ति का प्रचार: नारद भगवान के अनन्य भक्त हैं और अपनी वीणा की धुन पर भगवान के गुणों का गान करते हुए तीनों लोकों में विचरण करते हैं।
भक्ति मार्गदर्शक: वे भगवान के संदेशवाहक और भक्तों के मार्गदर्शक हैं, जो भक्ति और महात्म्य का विस्तार करते हैं।
यज्ञदत्त के पुत्र गुणनिधि का चरित्र (स्कंद पुराण के अनुसार):
प्रारंभिक अवगुण: गुणनिधि अपने नाम के विपरीत था; वह बुरी संगत में पड़कर चोर बन गया और उसे उसके पिता ने घर से निकाल दिया।
भटकाव और पश्चाताप: इसके बाद वह और भी गलत काम करने लगा और उसे देश निकाला भी मिला। भूख-प्यास से व्याकुल होकर वह भटक रहा था और उसे शिव कृपा से कुबेर का पद मिला।
भक्ति की विजय: यह कहानी दर्शाती है कि कैसे एक अवगुणी व्यक्ति भी सच्ची भक्ति और भगवान की कृपा से उद्धार पा सकता है, जो ‘विजय’ के समान है, जैसा कि कुछ कथाओं में गुणनिधि के उद्धार को ‘विजय’ बताया गया है। नारद भक्ति के प्रचारक हैं और गुणनिधि का चरित्र यह बताता है कि भक्ति से कैसे अवगुणों पर विजय प्राप्त कर ली जाती है। इस शिव महापुराण कथा सुनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु लोग पूछ रहे हैं कथा के तत्पश्चात भोजन प्रसादी का व्यवस्था किया जाता है।

जिसमें प्रमुख रूप से उपस्थित रहे अगर सिंह गंजीर सुशील गजीर सुनील गंजीर डिंपल सुषमा, खेदु पटेल परशु पटेल अमन पटेल सुरेश पटेल फूलचंद जगंजीर श्यामलाल गजीर बिशेषर साहू राधे लाल निषाद पवित निषाद तोरण साहू एवं समस्त ग्रामवासी

You cannot copy content of this page