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गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन की दिशा में सशक्त पहल – डाइट दुर्ग अछोटी में ब्लू-प्रिंट आधारित प्रश्न निर्माण प्रशिक्षण का सफल समापन

बालोद/दुर्ग- डाइट दुर्ग अछोटी में आयोजित ब्लू-प्रिंट पर आधारित प्रश्न निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शैक्षिक गुणवत्ता एवं मूल्यांकन प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में हुआ। कार्यक्रम के समापन अवसर पर हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलसचिव डॉ. भूपेंद्र कुलदीप मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में डॉ. कुलदीप ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में केवल पाठ्यवस्तु का अध्यापन पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्लो लर्नर, मिड लर्नर एवं फास्ट लर्नर—तीनों श्रेणियों के विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए अध्यापन किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) आधारित प्रश्न निर्माण ही विद्यार्थियों के वास्तविक आकलन का सशक्त माध्यम है। साथ ही उन्होंने नैतिक मूल्यों के क्षरण पर चिंता व्यक्त करते हुए नैतिक शिक्षा को शिक्षण प्रक्रिया का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया।
डाइट प्राचार्य श्री पी. सी. मरकले ने कहा कि ब्लूप्रिन्ट प्रश्नपत्र निर्माण की आधारशिला है। प्रश्न निर्माण के दौरान अंकों का संतुलित अनुपात, संपूर्ण पाठ्यक्रम की समुचित कवरेज एवं महत्वपूर्ण अध्यायों से उच्च स्तरीय प्रश्नों का समावेश आवश्यक है।
प्रशिक्षण सत्रों में डॉ. भट्टाचार्य, डॉ. नीलम दुबे एवं डॉ. हेमंत साहू (सहायक प्राध्यापक) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, शाला संस्कृति, शैक्षिक वातावरण, भारतीय संस्कृति एवं ब्लूम्स टैक्सोनॉमी के माध्यम से ज्ञान, समझ, अनुप्रयोग, विश्लेषण एवं सृजन स्तर के प्रश्न निर्माण पर विस्तृत चर्चा की गई।


इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बालोद जिले से वाणिज्य समूह के डीआरजी (DRG) श्री विवेक धुर्वे, कृषि समूह से डीआरजी डॉ. अनुपम मौर्य तथा दुर्ग जिले से डीआरजी श्रीमती निभा रानी मधु ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर श्री विवेक धुर्वे ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मूल्यांकन का उद्देश्य अब केवल अंकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विद्यार्थियों की समझ, तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच एवं व्यवहारिक दक्षता के विकास पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि ब्लूप्रिन्ट आधारित प्रश्नपत्र शिक्षकों को अधिगम-प्रतिफल, पाठ्यवस्तु एवं मूल्यांकन के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित करने में सहायक होता है, इसलिए प्रत्येक शिक्षक के लिए ब्लूप्रिन्ट की व्यावहारिक जानकारी अनिवार्य है। प्रशिक्षण के नोडल अधिकारी श्री सत्येन्द्र शर्मा ने जानकारी दी कि (सीपीडी – कंटीन्यूअस प्रोफेशनल डेवलपमेंट) के अंतर्गत कुल 50 घंटे का प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर्स द्वारा संकायवार (कला, विज्ञान, वाणिज्य एवं कृषि) तथा विकासखंडवार (दुर्ग, पाटन, धमधा, बालोद, गुंडरदेही, गुरूर, डौंडीलोहारा एवं डौंडी) सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया है। इसके पश्चात् संचालक एस.सी.ई.आर.टी. रायपुर के निर्देशानुसार आगामी दिनों में ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण चरणबद्ध रूप से आयोजित किए जाएंगे।

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. वंदना सिंह (सहायक प्राध्यापक) द्वारा किया गया। इस अवसर पर स्टाफ सदस्य सुषमा हिरवानी, अनुजा मुरेकर, आभा वर्मा, तृप्ति चंद्रवंशी तथा मास्टर ट्रेनर्स डॉ. अनुपम मौर्य, विवेक धुर्वे, श्रीमती निभा रानी मधु, सपना सोनी, रत्ना साहू, संजय भुवाल, पुष्पराज, रमेश कुमार साहू एवं ठाकुर की उल्लेखनीय भूमिका रही।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

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