बालोद– कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि रबी वर्ष 2025- 26 में जिले में बढ़ते जल संकट को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा विभागीय प्रदर्शन के माध्यम से 4091 हे. में रबी फसल जैसे चना, उड़द, गेंहू, मक्का, सरसों, कुसुम, गन्ना आदि फसलों के माध्यम से फसल चक्र अंतर्गत अब तक 1455 हेक्टेयर में कृषकों से दलहनी-तिलहनी फसलों का बुआई कार्य पूर्ण कर लिया गया है। रबी फसल बुआई का कार्य अभी प्रगति पर है। जिले में इस वर्ष विकासखण्ड बालोद के परसदा, खैरवाही, बेलमाण्ड, लाटाबोड़, विकासखण्ड डौण्डीलोहारा में हितापठार, मुड़पार, खोलझर, बुल्लूटोला, पिपरखार (ना), कन्याबडरी. मनकी (सा), केरीजुगॅरा, विकासखण्ड गुण्डरदेही के ग्राम मोंगरी, सलौनी, फूलझर आदि ग्रामों के किसानों द्वारा पूर्ण रुप से ग्रीष्मकालीन धान के बदले अन्य दलहनी-तिलहनी फसल ले रहे है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के माध्यम रबी वर्ष 2025-26 में 565 आयोजित कृषक चैपाल 7780 कृषक सम्मिलित हुए है। इन चैपालों के माध्यम से खरीफ वर्ष 2025 में फसल कटाई के पश्चात फसल अवशेष के उचित प्रबंध (यथा पशुचारे के रुप में उपयोग करने, कम्पोस्ट खाद बनाने आदि) के संबंध में कृषकों को सलाह एवं पैरादान कराने के उद्देश्य से जन जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिससे फसल अवशेष को जलाने से होने वाले पर्यावरण एवं मृदा स्वास्थ्य के नुकसान को रोका जा सके। इससे प्रेरित हो कर कृषकों द्वारा जानवरों के लिए चारा व्यवस्था हेतु खेतों में पड़े पैरा संग्रहण का कार्य कर रहें है एवं जैविक कृषकों द्वारा पैरा से कम्पोष्ट खाद बनाने में उपयोग कर रहे है।
