अर्जुन्दा महाविद्यालय में जनजाति समाज का गौरवशाली अतीत दिवस के अवसर पर व्याख्यान एवं लघु फ़िल्म प्रदर्शित



बालोद। शहीद दुर्वासा निषाद शासकीय महाविद्यालय अर्जुन्दा में जनजाति समाज का गौरवशाली अतीत – ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया l कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं राजकीय गीत से किया गया l सांस्कृतिक समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति से जुड़ी लघु फ़िल्म का प्रदर्शन एवं जनजातीय नायकों के योगदान पर व्याख्यान दिया गया l प्रभारी प्राचार्य डॉ. दीपिका ने कहा कि जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत उनके समृद्ध सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान को दर्शाता है। उनकी अनमोल धरोहर को संरक्षित करना और उनके योगदान को पहचान दिलाना न केवल उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना है, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा भी है। कार्यक्रम की संयोजक दीपिका कंवर ने कहा कि जनजातीय समाज भारत के इतिहास और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है,जो न केवल उनके रीति-रिवाजों और परंपराओं को दर्शाता है, बल्कि उनके ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान की भी गवाही देता है। जनजातीय समुदायों ने भारतीय समाज की समृद्धि और विविधता में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसका स्मरण रखना, अनुसरण करना और सम्मान देना हमारा कर्तव्य है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। शहीद वीर नारायण सिंह, भगवान बिरसा मुंडा, रानी दुर्गावती जैसे वीर जनजातीय नेताओं ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया, जिनके बलिदानों को इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया। भगवान बिरसा मुंडा एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह के जीवनी एवं उनके आंदोलन के बारे में विस्तार से चर्चा की गई l जनजातीय विद्रोह ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी और समाज को संगठित कर अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला l आज भी उनके पारंपरिक ज्ञान और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रियाएं आधुनिक समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है l जनजातीय समाज की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराएँ प्रकृति के साथ गहरा संबंध रखती हैं। उनकी मान्यताएँ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के सिद्धांतों के साथ मेल खाती हैं। उनके द्वारा की जाने वाली पूजा, त्योहार और अनुष्ठान, जो प्राकृतिक तत्वों जैसे – पर्वत, नदियाँ , वृक्षों की पूजा पर आधारित हैं, जो हमें प्रकृति के प्रति प्रेम और सम्मान का संदेश देते हैं। इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रीति ध्रुवे, डॉ. प्रदीप कुमार प्रजापति, ग्रंथपाल श्री अनिल नागवंशी , समस्त प्राध्यापकगण एवं छात्र- छात्राएं शामिल हुए ।

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