संयम की राह पर चली लोहारा नगर की बेटी मेघा, 8 अक्टूबर को अभिनंदन समारोह



बालोद। वह मार्ग है शांति का, वह मार्ग है आत्मा से परमात्मा बनने का, वह मार्ग है मुक्ति मंजिल पाने का, वह मार्ग है शाश्वत सुख को प्राप्त करने का। जी हां उसी शाश्वत सुखों को प्राप्त करने डौंडीलोहारा नगर की लाडली बिटिया मेघा डोसी ने संयम का मार्ग चुना है। संसार की आसरता को उसने बहुत ही कम उम्र में जान लिया व समझ लिया तभी तो तलवार की धार पर चलने जैसा मार्ग संयम जीवन का वरण करने वाली है। जहां पर संसार की कोई भी सुख सुविधा उपलब्ध नही होगी। होगा तो बस धर्म आराधना व आत्मा को परमात्मा बनाने वाली साधना। शादी से संबंधित हर एक नेग होंगे कुमकुम होगी, हल्दी होगी, मेहंदी होगी मंगल गीत गाए जाएंगे विदाई भी होगी पर फेरे का मंडप नही होगा और न ही कोई दूल्हा होगा। उन्होंने साधना को ही अपना जीवनसाथी चुना है व उसी साधना आराधना के साथ मन से फेरे लेकर उसी जीवनसाथी के साथ जीवन पर्यंत साथ चलेगी व आत्मकल्याण व स्व पर कल्याण के पथ पर अग्रसर रहेगी। तीन नवम्बर को राजस्थान के देशनोक नगर में मेघा डोसी आचार्य भगवन श्रीरामलालजी मसा के मुखारविंद से संयम पथ की दीक्षा अंगीकार करेंगी उनके साथ संभावित पांच और बहन दीक्षा अंगीकार करेंगी। दीक्षा के बाद वे जैन साध्वी बन जाएंगी।नया नामकरण होगा। साधु साध्वी समाज के आचार संहिता के तहत उन्हें चलना होगा। आजीवन बिजली, पंखे, मोबाइल, वाहन, जूते, चप्पल, धन, दौलत आदि के त्याग हो जाएंगे। एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए पद विहार करना होगा। अल्प परिग्रह होंगे। लिमिटेड कपड़े व आहार पानी के लिए लकड़ी के पात्र होंगे। भिक्षा चर्या से नियमानुसार आहार पानी ग्रहण करना होगा। सचित पदार्थो (जीव सहित) को छूने की भी मनाही होगी।
चातुर्मास के चार महीने एक ही स्थान पर व बाकी के आठ महीने ग्रामानुग्राम पद विहार कर धर्म जागरण व भगवान महावीर की वाणी को लोगों तक पहुंचाने के काम करेंगे। आत्मा को परमात्मा बनाने के लिए भगवान ने एकमात्र रास्ता संयम जीवन को ही बताया है इसलिए अपने शक्ति व सामर्थ्य को जागृत अवश्य ही करें व संयम जीवन को अंगीकार करते हुए इस अमूल्य मानव भव को सार्थक अवश्य ही करें। जिस प्रकार फेमस जगह की फेमस वस्तु को देखने जाते हैं, वहां पर उपलब्ध फेमस चीजों को खरीदने का प्रयास करते हैं व खरीदते भी है। ठीक मानव भव की सबसे फेमश व अमूल्य चीज है संयम जीवन। इस संयम जीवन को सभी को ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए। हर आत्मा में परमात्मा बनने की शक्ति छिपी हुई है बस जरूरत है सम्यक पुरुषार्थ की।

इस तरह से लिया गया साध्वी बनने का निर्णय

चातुर्मास के दिनों में साधू साध्वियों के साथ साधना आराधना की शुरुआत हुई। बचपन से माता पिता व घर वालों के धर्म के संस्कार रूपी बीज बोए गए थे । जैन आगमों का अध्ययन शुरू किया। पाप पुण्य को समझा। मानव भव की अमूल्यता को सही मायनों में जाना समझा व परखा। साधु साध्वियों की संगति शुरू की। विभिन्न धार्मिक आध्यात्मिक शिविरों को माध्यम से स्वयं को जाना। आत्मा के स्वरूप को समझा। मूमुक्षु शिविर के माध्यम से साध्वी जीवन चर्या को परखा।राजस्थान के बीकानेर स्थित भीनासर में संचालित आरुग्यबोहिलाभम संस्कार शिविर को अटैंड करने के बाद मन दृढ़ संकल्पित हो गया। फिर उनका अगला लक्ष्य बना घर वालो को इसके लिए तैयार करना क्योंकि यह सब उतना आसान नहीं था।
आगम की बातों को वर्तमान व आचार्य भगवन श्रीरामलालजी मसा व उपाध्याय प्रवर की साधनाओं को सामने रखा। संसार की आसरता व मानव भव की सार्थकता को सामने रखा। इतने कठिन मार्ग पर चलने की आज्ञा देना परिजनों के लिए बड़ा ही कठिन निर्णय था। साथ ही साथ बिटिया के जिनशासन की ओर कदम बढ़ाने की खुशी भी थी। नम नयनों से हृदय पर पत्थर रखकर उसके सच्चे मार्ग पर चलने की सहमति दी। व आचार्य भगवन व उपाध्याय प्रवर के चरणों मे अनुज्ञा पत्र सौंपा गया।

धार्मिक संस्कार शिविर में अवश्य ही भाग ले-मूमुक्षु बहन

समय समय पर आयोजित होने वाले धार्मिक शिविर सहित भीनासर में चलने वाले आरुज्ञ भोहि लाभम के क्लास अवश्य ही अटैंड करें। इससे हमें अपने आपको जानने समझने का अवसर मिलता है। इस मानव भव की खास चीज भी संयम जीवन है संयम जीवन को नजदीक से देखे व उसे एक न एक दिन अवश्य ही ग्रहण करें। भगवान महावीर ने अमूल्य मानव भव के एक एक क्षण को अमूल्य बताया है। एक क्षण भी प्रमाद में गंवाने नही कहा है। भगवान ने आत्मकल्याण के लिए एक ही मार्ग बताया है और वह है संयम जीवन। गुरु भगवंतों के सानिध्य में गुरुकृपा से संयम जीवन को जानने समझने का अवसर मिला है। अब संयम जीवन को धारण कर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना है। संघ समाज से जाने अनजाने गलतियों की क्षमा याचना करते हुए अधिक से अधिक धर्म आराधना करने का आह्वान किया है।

2 अक्टूबर को हुआ कुमकुम का कार्यक्रम

दीक्षा प्रसंग के निमित्त मांगलिक कार्यक्रम की शुरुआत गुरुवार को कुमकुम के कार्यक्रम से हुई।संघ समाज व पारिवारिक जनों के मध्य कुमकुम पत्रिका आदि को विधिवत केसर कुमकुम से अंकित करते हुए मांगलिक कार्यक्रम की शुरुआत की गई।इस दौरान मुमुक्षु बहन मेघा डोसी ने भी अपने आराध्य भगवन श्रीरामलाल जी मसा के नाम व दीक्षा दिवस के दिन को केसर से एक सादे सफेद वस्त्र में अंकित किया।इसी के साथ दीक्षा प्रसंग की मंगलमय शुरुआत हो गई।

8 अक्टूबर को भव्य वरघोड़ा व अभिनन्दन समारोह

नगर के जैन समाज ने आठ अक्टूबर को मुमुक्षु बहन के सम्मान में सुबह आठ बजे से भव्य वरघोडा का आयोजन किया हैजो नगर के विभिन्न मार्गों से होकर निकलेगी।भव्य बग्घी में सवार होकर मुमुक्षु बहन लोगो का अभिवादन स्वीकार करेंगी व जाने अनजाने गलतियों की क्षमा याचना भी करेंगी। 10.30 बजे से नगर के ए पी एस प्रांगण में अभिनन्दन समारोह होगा। संघ समाज के द्वारा मुमुक्षु बहन व पारिवारिक जनों का अभिनन्दन किया जाएगा। उक्त अवसर पर मुमुक्षु मेघा डोसी के विशेष उद्बोधन भी होंगे।

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