
गुरूर।सप्तक इंटरनेशनल द्वारा आयोजित,श्री गणेश संगम महोत्सव,इंटरनेशनल कल्चरल फेस्टिवल 2025, जहां पर 27 से 30 अगस्त तक देश विदेश से कलाकारो की प्रस्तुति हुई l गुवाहाटी असम के सुप्रसिद्ध फोक एवं क्लासिकल टीचर इंटरनेशनल कलाकार श्रीमती मोंजू हालीराम बोरह के दिशा निर्देशन मे दिनांक 29 अगस्त को छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध लोक सांस्कृतिक संस्था सोनहा बादर चिटौद (गुरुर ) जिला बालोद छत्तीसगढ़ का झमाझम प्रदर्शन हुआ। साथ ही श्रीलंका से दुमीथा गुणवर्धना,मुंबई से क्षमा कुलकर्णी,महाराष्ट्र से बालासाहेब नारारे, महाराष्ट्र से सुयोग डांस ग्रुप एवं असम से बीहू डांस ग्रुप की प्रस्तुति किया गया।l ऐसे ही अलग अलग दिन भारत के अलग अलग राज्यों से व विदेशो के कलाकारों की प्रस्तुति हुई। सोनहा बादर के संचालक, निर्देशक, गीतकार, संगीतकार जितेन्द्र साहू ने आयोजक समिति दर्शकों व छत्तीसगढ़ का नमन आभार व्यक्त करते हुए बताया कि इस बार भी हमारे लिए सुनहरा अवसर रहा। गुवाहाटी असम के विशाल व ऐतिहासिक मंच पर प्रदर्शन करने का सौभाग्य हमें मिला। सभी कलाकारों ने पूरे जोश व मर्यादित होकर सफल व नैनाभिराम प्रदर्शन करने में कामयाब रहे । हमारी हरेक प्रस्तुति में तालियों की बौछार होती रही। भगवान कृपा,माता पिता,गुरुजन वरिष्ठ जन व छत्तीसगढ़ महतारी के आशीर्वाद दया दृष्टि से निरंतर हमें भारत के अलग अलग राज्यों व विदेश में छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति, परम्परा को गीत संगीत के माध्यम से प्रदर्शित करने का सौभाग्य मिलता आ रहा है।

2023 में शिमला व 2024 में नेपाल काठमांडू, जहां सोनहा बादर के आदिवासी नृत्य एवं करमा नृत्य को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया एवं ड्रामा तिरिया जनम को बेस्ट प्ले अवार्ड मिला। इस बार मई जुन, जुलाई में नये सत्र कार्यशाला 2025-26 के माध्यम से समूचे छत्तीसगढ़ व देश विदेशो में छत्तीसगढ़ की सौंधी माटी को महकाने हेतु, छत्तीसगढ़ के कला, संस्कृति, साहित्य परम्परा को आत्मसाध कर नये नये कलेवर, हास्य व संदेश परक प्रहसन व हृदय स्पर्शी गीत, संगीत, अभिनय, मनमोहक नृत्य के साथ सोनहा बादर के सभी कलाकार निरंतर साधना रियाज़ करके प्रदर्शन हेतु पूर्ण रूपेण तैयार है। 29 अगस्त को हमारी सोनहा बादर की प्रस्तुति गुवाहाटी असम मे हुई । जहां हमने आदिवासी नृत्य, कर्मा नृत्य, ददरिया, एवं असम व राजस्थान का हल्का अंश लेते हुए छत्तीसगढी बोली भाषा गीत संगीत में व नृत्य का प्रदर्शन किये। जहां पर पहुँचे राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय कलाकार एवं समूचे दर्शको का भरपूर प्यार मिला। समस्त प्रस्तुति में तालियों की बौछार होती रही। छत्तीसगढ़ का जयकारा गूँजता रहा। सोनहा बादर के मंच संचालक परमानन्द गुरुपंच ने अपने संचालन से मंत्रमुग्ध करता रहा। आयोजक द्वारा सभी कलाकारों को मोमेंटो, प्रतीक चिन्ह, प्रशस्ति पत्र व असमिया चादर देकर सम्मानित किया गया। सोनहा बादर की सफल प्रस्तुति पर समस्त ग्रामीण जन अंचलवासी,वरिष्ठ जन,गुरुजन व छत्तीसगढ़ के दर्शकों ने शुभकामनायें प्रेषित की।
