पुरातत्व विभाग द्वारा है संरक्षित,पर सरकार से नहीं मिली कोई मदद, गांव के लोग समिति बनाकर कर रहे मंदिर का उद्धार, तालाब में मिली थी मूर्ति

आकार बढ़ने के कारण लोग मानते हैं इसे चमत्कारी,दर्शन करने के लिए आते हैं दूर- दूर से, मन्नत होती है पूरी
दीपक देवदास, गुरुर। गुरुर से लगे हुए ग्राम कोलिहामार में एक ऐसा गणेश मंदिर है जहां की मूर्ति सातवीं शताब्दी की है, जो कि पुरातत्व विभाग के तहत संरक्षित भी किया गया है लेकिन शासन प्रशासन और विभाग ने इसकी आज तक कोई सुध ही नहीं ली है। वर्तमान में करीब 5 साल से गांव के युवा एक समिति बनाकर इस मंदिर का उद्धार कर रहे हैं। अपने स्तर पर लोग आपस में चंदा करके मंदिर का धीरे-धीरे विकास कार्य किया जा रहा है । पर सरकार से कोई मदद आज तक इन्हें नहीं मिली है। तालाब से निकली मूर्ति के प्रति लोगों में अपनी विशेष आस्था और मान्यताएं हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि धीरे-धीरे मूर्ति का आकार बढ़ते क्रम पर है। वर्तमान में मूर्ति की ऊंचाई लगभग चार से पांच फीट हो गई है। मूर्ति एकाश्म पत्थर को तराश कर बनाई गई है। यह मूर्ति पास में ही स्थित एक तालाब में मिली थी। गणेश की मूर्ति मिलने के कारण उक्त तालाब को गणेशा तालाब भी कहा जाता है। तालाब के किनारे पर ही यहां मंदिर का जीणोद्धार किया जा रहा है। लोग यहां दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं और अपनी मनोकामना के साथ मन्नत मांगते हैं।
ऐसा गणेश मंदिर जहां होता है अथर्व शीर्ष का पाठ, वैदिक विधान से होती है पूजा अर्चना

मंदिर के पुजारी सुरेश पांडे ने बताया कि गणेश मंदिर में वैदिक पद्धति से पूजा की जाती है। अथर्व शीर्ष का पाठ और अभिषेक का आयोजन होता है। ऐसा आसपास के कहीं मंदिरों में नहीं होता है । उन्होंने बताया कि गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ एक प्राचीन वैदिक मंत्रों का संग्रह है, जिससे गणेश जी की स्तुति की जाती है। यह वैदिक मंत्रों का एक समूह है जो भगवान गणेश को ब्रह्मांड का मुखिया बताता है। यह अथर्ववेद के गणपति उपनिषद से लिया गया है, अथर्व का अर्थ कार्य की शीघ्र सिद्धि होता है। यह पाठ करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, कार्यों में शीघ्र सिद्धि मिलती है, आर्थिक समृद्धि आती है, और मानसिक शांति व शक्ति प्राप्त होती है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने की थी घोषणा, पर नहीं हुआ कुछ काम
मंदिर समिति से जुड़े हुए लोगों ने बताया कि जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह थे तो उस समय गणेशा तालाब के सुंदरीकरण की घोषणा की गई थी। लेकिन आज तक कोई काम हुआ ही नहीं है। जीर्ण शीर्ण अवस्था में पुराना मंदिर था जिसे अब गांव के युवा मिलजुल कर नया रूप दे रहे हैं। शासन प्रशासन की उपेक्षा को नजर अंदाज कर लोगों की आस्था का ध्यान रखते हुए कोलिहामार में समिति बनाकर इस मंदिर का जीर्णोद्धार जारी है।
बगल में है श्री राम लक्ष्मण और सीता की भी प्राचीन मूर्तियां

गणेशा तालाब एक ऐतिहासिक तालाब है, जहां पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई के दौरान यहां गणेश की मूर्ति के साथ ही एक ही पत्थर पर उकेरी गई राम लक्ष्मण और माता सीता की मूर्तियां भी मिली हुई है। जिसे तालाब के किनारे में रखा गया है। इस मूर्ति के लिए भी एक नया मंदिर बनाने का संकल्प लेते हुए समिति के लोग आपस में चंदा इकट्ठा करने में जुटे हुए हैं।
पुरातत्व विभाग संरक्षित पर नहीं लगा आज तक कोई बोर्ड
शासन द्वारा डॉ रमन सिंह मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान जब पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल थे, तो यहां एक सर्वे कराया गया था ल, जिसके तहत इस गणेश मंदिर को सातवीं शताब्दी का मानते हुए इसे पुरातत्व विभाग के तहत संरक्षित स्मारक बताया गया था। लेकिन सिर्फ कागजी कार्रवाई हुई। आज तक यहां ना कोई बोर्ड लगा है ना पुरातत्व विभाग द्वारा इसके संरक्षण को लेकर कोई प्रयास किया गया है।
समिति बनाकर कर रहे मंदिरों का नवनिर्माण

पुजारी ने बताया कि 15 लोगों की समिति बनी हुई है, जिनके द्वारा धीरे-धीरे विभिन्न मंदिरों का निर्माण किया जा रहा है गणेश मंदिर का निर्माण कार्य जारी है, साथ ही श्री राम मंदिर और शंकर जी का मंदिर भी बनाया जाएगा। इसके लिए दानदाताओं से भी मदद ली जा रही है। कई लोग इसमें अपना योगदान दे रहे हैं। इस क्रम में खेदुरम साहू संरक्षक द्वारा 51000, कमल नारायण साहू द्वारा 51000 सहित अन्य दानदाताओं द्वारा अपनी इच्छा अनुसार चंदा दिया गया है। समिति में कमल नारायण साहू अध्यक्ष, दीपेश कुमार पटेल उपाध्यक्ष, गोवर्धन साहू सचिव, पवन कुमार कोषाध्यक्ष, लिलेश साहू सह कोषाध्यक्ष के रूप में जुड़े हुए हैं।
