कबीर सत्संग समारोह संपन्न, देहदान, नेत्रदान की घोषणा कर चुके हुए सम्मानित, 15 और भी हुए प्रेरित



बालोद। बालोद जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर ग्राम करहीभदर में विगत 65 वर्षों से कबीर पारख का परचम लहरा रहा है। इस आश्रम पर समय-समय से विभिन्न प्रांतो से संतों एवं भक्तों का आवागमन लगा रहता है। यहां प्रतिदिन प्रातः 4 बजे जागरण, 5:30 से 6:30 तक ध्यान साधना होता है। इसके पश्चात सद्गुरु कबीर साहेब के मूलग्रंथ बीजक की व्याख्या गुरुदेव के पारख प्रबोधिनी टीका प्रयागराज के आधार पर संदेश दिया जाता है
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दो दिवसीय भव्य कबीर सत्संग समारोह का शुभारंभ कबीर धर्म मंदिर जीयनपुर अयोध्या उत्तर प्रदेश, परीक्षा साहेब , गुरुभूषण साहेब पारख आश्रम सूरत के कर कमलों द्वारा पारख का ध्वजा रोहन किया गया। इसके पश्चात सदगुरु कबीर के मूल ग्रंथ बीजक का पाठ हुआ। इस आयोजन के अवसर पर मरणोपरांत नेत्रदान एवं देहदान करने वाले संकल्पित व्यक्तियों और जिनका देहदान हो चुका ऐसे लोगों के 10 परिजनों को सम्मान किया गया। इस वर्ष 15 नए लोगों ने देहदान और नेत्रदान करने का संकल्प पत्र भरा, उनका भी सम्मान किया गया। आयोजन के दौरान संत हरि साहब ने अपने मधुर ध्वनि से ‘सद्गुरु से करते जाना प्यार ए,नादान मुसाफिर’ भजन गाकर श्रोता समाज को मुग्ध कर दिये। कबीर धर्म मंदिर कबीर जियनपुर अयोध्या उत्तर प्रदेश से पधारे परीक्षा साहब ने स्वतंत्र चिंतन पर जोर देते हुए अपने उद्बोधन में कहा, “कबीरपंथी होना सौभाग्यशाली होना है,क्योंकि कबीर साहेब कपिल,कणाद, महावीर और बुद्ध की तरह स्वतंत्र चिंतन करते थे। किसी भी परंपरा की थोपी हुई बातें नहीं करते थे। ज्यों का त्यों कहने में वे नहीं हिचकते थे। सत्य का संदेश कबीर का संदेश है चाहे कोई वक्त हो। कबीर पारख आश्रम सूरत से पधारे गुरुभूषण साहेब ने कहा, “अपने मन की पीड़ा दूर कर आंतरिक शांति प्राप्त करना है। महान पुरुषों की पूजा करना क्योंकि उनके विचार को अपने जीवन में आत्मसात करना है। उनके पद चिन्ह पर चलना है । पूजा हम अपने लिए करते हैं अपने जीवन में सुख शांति के लिए न की महान पुरुषों के लाभ के लिए। प्रतिकूल परिस्थिति में भी धैर्य धारण करें, अपने अंदर के सद्गुणों को जागृत कर सद् व्यवहार करें। किसी ने गलत व्यवहार किया तो उनसे वैसे ही नहीं अपितु सज्जनता से व्यवहार करें। भौतिक विकास के साथ ही साथ आध्यात्मिक विकास की महती अवश्यकता है सत्संग समाज को दिखाने के लिए नहीं अपनी आत्म शुद्धि के लिए है।कबीर पारख आश्रम सूरत से पधारे हुए संत महेश साहब ने कहा, सत्संग हमें चलना, बोलना, खाना- पीना सारा व्यवहार सीखता है। रहनी संपन्न जीवन जीने का मार्ग कबीर का मार्ग है। कबीर आश्रम परसदा डगनिया से पधारे महंत पंचम साहब ने कहा,” आज कबीर के विचारों की महती आवश्यकता है। कबीर की पैनी दृष्टि में सत्य एवं असत्य साफ-साफ दृष्टिगोचर होता है। कबीर आश्रम करहीभदर के वरिष्ठ संत देवेंद्र साहेब ने कहा, “जीवन क्षणभंगुर है, जीवन रहते सेवा करें और मरने के पश्चात भी सेवा करें ,देहदान एवं नेत्रदान कर पुण्य के भागी बने, ताकि चिकित्सा महाविद्यालय में हमारे होनहार विद्यार्थी हमारे पार्थिव शरीर का अध्ययन कर कुशल चिकित्सक बन सके और मरीज की सफल चिकित्सा कर सकें। संत श्री दिनेंद्र साहेब कबीर आश्रम करहीभदर ने दानदाताओं के नाम लेते हुए कहा,” भक्त प्रवर श्री सखाराम साहू एवं उनके परिवार ग्राम हल्दी ने अपने पुत्रवधू श्रीमती मधु साहू एवं पुत्र शैलेश की पुण्यतिथि में उनके नाम से आश्रम में भंडारा किये ।सखाराम हम सबका प्रेरक हैं ताकि हम भी भविष्य में अपने परिजन की पुण्य स्मृति में संतों की सेवा , सत्संग भंडारा कर सके। दूसरे दिन के आयोजन लिए विशेष सहयोग स्वर्गीय श्री अरुण कुमार ,भानपुरी एवम् स्वर्गीय अंजोर दास के परिजनो तथा श्री धर्मेन्द्र श्रवण की ओर से हुआ।


कार्यक्रम में आभार व्यक्त करते हुए कबीर आश्रम करहीभदर के व्यवस्थापक सुशांत साहेब ने कहा, “समस्त संतों एवं श्रद्धालु भक्तों के सहयोग से यह कार्यक्रम संपन्न हुआ ।ऐसे ही संतों के प्रति श्रद्धा भक्ति समर्पण की भावना बनी रहे और अपना जीवन कल्याण की ओर अग्रसर रहें। भक्त प्रवर सखाराम ने कहा,”हमारे परिजन परिवार कई पीढ़ी से भक्त हैं ।संतों की सेवा करते आये हैं और आगामी सेवा भक्ति एवं सत्संग करते रहेंगे। संतों का आशीर्वाद हमारे परिवार पर बना रहे यही मेरी शुभकामनाएं हैं। गुरुपूजा,भोज भंडारा के साथ कार्यक्रम सकुशल संपन्न हुआ।

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