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विश्व हिन्दु परिषद बजरंग दल बालोद ने टेकापार के गुमशुदा मंगेश्वर ठाकुर ढूंढ लाने सौंपा ज्ञापन, तमिलनाडु गया युवक है 15 दिन से लापता, जानिए पूरा मामला,,,,?

बालोद। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का कार्य, सेवा सुरक्षा और संस्कार है। इसी

क्रम में टेकापार के गुम “मगेश्वर ठाकुर” को ढूंढकर उनके परिजनों को सौंपने की मांग बालोद जिला विश्व में परिषद बजरंग दल द्वारा किया गया।

जिसके तहत महामहिम राष्ट्रपति भारत सरकार नई दिल्ली (भारत), महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़ को अनुविभागीय अधिकारी/ दंडाधिकारी, कार्यालय बालोद, द्वारा ज्ञापन भेजा गया। जिसमें मांग की गई कि पुलिस-प्रशासन एवं संबंधित एजेंसियों की मदद से अतिशीघ्र कार्यवाही कर कोयंबटूर में ईशा फाउंडेशन के मेले में गए और वहां गुम हुए “मगेश्वर ठाकुर” को ढूंढकर उनके परिजनों को सौंपा जाए। ज्ञापन में बताया गया कि 27 फरवरी.2024 को तमिलनाडु राज्य के जिला कोयम्बटूर के “ईशा फाऊंडेशन” में 08. मार्च को आयोजित महाशिवरात्रि कार्यक्रम में शामिल होने बताकर अपने निवास स्थान ग्राम टेकापार से निकला था, जहां दिनांक 11 मार्च तक रुका था और वहां से वापिस आने के लिये ट्रेन चढ़ने निकला था, किंतु “मगेश्वर ठाकुर” आज दिनांक तक अपने घर ग्राम टेकापार वापिस नहीं आया है। इस संबंध में “मगेश्वर ठाकुर” के परिवार वाले थाना प्रभारी, थाना उक्कड़म, जिला कोयम्बटूर (तमिलनाडु) के समक्ष लिखित सूचना दिये थे, जिस पर थाना उक्कड़म, जिला कोयम्बटूर (तमिलनाडु) के द्वारा दिनांक 20.03.2024 को (गुम इंसान) प्रथम सूचना रिपोर्ट क्रमांक 38/ 2024 दर्ज किया गया है। पश्चात दिनांक 21 मार्च को उक्त मामले में त्वरित जांच व कार्यवाही किये जाने हेतु गृहमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन रायपुर (छ.ग.) के समक्ष लिखित शिकायत की गई जिसकी प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक बालोद (छ.ग.) को दी गई है। “मगेश्वर ठाकुर” के परिवार वाले कोयम्बटूर रेल्वे स्टेशन, रेल्वे पुलिस फोर्स, जनरल रेल्वे पुलिस एवं थाना उक्कड़म जाकर एवं आस-पास एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पता-साजी करने के बाद भी “मगेश्वर ठाकुर” का कोई पता नहीं चला और आज तक “मगेश्वर ठाकुर” वापिस घर नहीं आया है। जिसके कारण “मगेश्वर ठाकुर” के परिजन अत्यधिक मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं। वहीं कुछ समाचार पत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक उक्त ईशा फाऊंडेशन योग केन्द्र से 2016 से अब तक 06 लोग लापता हो चुके हैं, जिनका आज तक कोई पता नहीं चला है। इस संबंध में तमिलनाडु / मद्रास हाईकोर्ट में याचिका भी पेश हुआ है। उक्त संवेदनशील एवं गंभीर मामले में विश्व हिन्दू परिषद बजरंग दल, जिला बालोद (छ.ग.) छत्तीसगढ़ पुलिस-प्रशासन एवं संबंधित एजेंसियों की मदद से अतिशीघ्र कार्यवाही कर गुम “मगेश्वर ठाकुर” को ढूंढकर उनके परिजनों को सौपने की पुरजोर मांग की गई है। विश्व हिंदू परिषद जिला सह मंत्री सतीश विश्वकर्मा के नेतृत्व में मांग पत्र सौंपा गया। इस दौरान बजरंग दल जिला संयोजक उमेश कुमार सेन, बजरंग दल के सौरभ शर्मा ,
लोकेश साहू आदि मौजूद रहे।

परिजन ने कहा फाउंडेशन से जुड़े लोग नहीं दे रहे पूरी जानकारी, लापता युवक था किसी मुसीबत में, मोबाइल भी हो चुका चोरी

ज्ञात हो कि बालोद ब्लाक के ग्राम टेकापार का रहने वाला 32 वर्षीय युवक मंगेश्वर ठाकुर लगभग 15 दिन से लापता है। वह तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा फाउंडेशन में 8 मार्च को शिवरात्रि मेले में शामिल होने गया था । घर से वह 27 फरवरी को निकला था। वह अपने ग्रुप के साथियों के साथ था। लेकिन उनके साथी पहले वहां से वापस हो गए और मंगेश्वर वहीं एक दो दिन और ठहरने की इच्छा के साथ रुक गया। लेकिन किसे पता था कि वह घर आ पाएगा या नहीं? उसके साथ ऐसी क्या अनहोनी हो गई कि वह लापता हो गया है। उसकी कहीं कोई खबर नहीं आ रही। लापता होने से पहले मंगेश्वर ने घर वालों से बातचीत की थी। परिजनों का कहना है कि वह काफी डरा सहमा हुआ था। कह रहा था कि मुझे किसी बांध कर रखा है। मुझे आकर बचा लो। वही अपनी भैया मंगेश्वर को तलाशने गई बहन केसरी ठाकुर का कहना है कि 7 दिन तक हम कोयंबटूर के अलग-अलग थाना क्षेत्र में भटकते रहे। अंततः उड़कम थाना में भैया के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई है। लेकिन स्थानीय पुलिस का अपेक्षित साथ नहीं मिल पा रहा है। वहां भाषा की भी समस्या है। जिसके चलते हम भैया को ढूंढ नहीं पाए हैं। वही ईशा फाऊंडेशन कोयंबटूर में जाकर भी पता किया गया तो वहां भी लोग अधूरी जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने एक स्वामी का जिक्र करते हुए कहा कि फोन पर उनसे बातचीत होती थी तो वह भी आधी अधूरी जानकारी देते थे। हमेशा फाउंडेशन के आश्रम में रहने वाले स्वामी जब हम वहां पहुंचे और फोन लगाया तो कहने लगी कि मैं तो हैदराबाद में हूं।

भैया को नागपुर तक आने के लिए टिकट भी कटवाए थे पर उसे पूरी जानकारी फाउंडेशन के लोगों ने दी ही नहीं

बहन केसरी ठाकुर ने आरोप लगाया कि फाउंडेशन के जुड़े लोगों से हम लगातार संपर्क में थे। भैया को वहां से नागपुर तक आने के लिए ऑनलाइन टिकट भी करवा दिए थे और फाउंडेशन के लोगों को बता भी दे दिए थे कि रात के 9:00 बजे उसकी ट्रेन है। उसे सही सलामत भेज दीजिएगा। लेकिन फाउंडेशन के जुड़े लोगों ने 12 मार्च को सुबह के 11 बजे ही मंगेश्वर को केंद्र से स्टेशन जाने के लिए कह दिया गया। 12:30 बजे लगभग दिन में ही वह स्टेशन पहुंच गया और फोन लगाया कि मेरा टिकट का क्या हुआ। मोबाइल में भेजिए। तब बहन ने बताया कि हमने तो रात के 9:00 बजे का टिकट कटवाया है ।ट्रेन अभी नहीं रात में 9:00 बजे है। तो मंगेश्वर को भी आश्चर्य हुआ कि मुझे तो किसी ने कुछ बताया ही नहीं है और सुबह ही उन्हें भटकने के लिए फाउंडेशन के लोगों ने छोड़ दिया था। फिर इसके बाद वह कहां गया, आगे क्या हुआ, किसी को कुछ मालूम नहीं। 13 मार्च को सुबह 7:00 के आसपास अपने पिता के खाते से ₹1000 कोयंबटूर के एटीएम से पैसा निकालने का मैसेज उनके बड़े भाई के मोबाइल नंबर पर आया था। उसके बाद किसी भी नंबर से मंगेशवर का फोन नहीं आया। ऐसे में कहीं ना कहीं फाउंडेशन से जुड़े लोगों की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत होने की बात बहन केसरी ठाकुर ने कही है। वही बालोद जिले के स्थानीय नेताओं और जिला पुलिस प्रशासन के जरिए भी मदद मांगने का प्रयास यह परिवार कर रहा है। यशवंत जैन भाजपा नेता के जरिए पर गृह मंत्री विजय शर्मा को भी पत्र लिखा गया है ।साथ ही पुलिस अधीक्षक को भी उन्होंने आवेदन दिया है। स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है चूंकि घटना तमिलनाडु में हुई है तो यहां हम मामला दर्ज नहीं कर सकते। वहीं के स्थानीय थाने में मामला दर्ज होगा । ढूंढने में कुछ हद तक मदद हो सकती है। पर दो हफ्ते बाद भी भैया मंगेश्वर ठाकुर की घर वापसी नहीं हो पाई है। परिजन काफी चिंतित हैं कि उसके साथ आखिर हुआ क्या है! मंगेश्वर ने आखिरी बार दूसरे के मोबाइल से बातचीत की थी जो की एक सीआईएसएफ के जवान थे और बताया था कि मेरा मोबाइल भी चोरी हो गया है। जब ढूंढते हुए बहन उक्त सीआईएसएफ जवान के पास पहुंचे तो उन्होंने बताया कि मंगेश्वर पैदल ही फुटपाथ की ओर घूम रहा था और उसने मुझे अपने भैया विशाल से बात करने के लिए मोबाइल मांगा थोड़ी देर बात करने के बाद मोबाइल देकर चला गया और कुछ जानकारी उक्त जवान नहीं दे पाया। सीसीटीवी फुटेज में भी कहीं कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है।

मद्रास हाई कोर्ट में चल रहा ईशा फाउंडेशन से लापता लोगों के मामले केस

बालोद जिले से टेकापार के मंगेश्वर ठाकुर के लापता होने का मामला इसलिए भी चर्चा में आ गया है। क्योंकि हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट ने दायर याचिका पर आदेश दिया है कि लापता लोगों की छानबीन की जाए। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि फाउंडेशन में आए हुए 6 लोग 2016 से लापता है। फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे योग केंद्र से 2016 से अब तक 6 लोग लापता है। यह जानकारी तमिलनाडु पुलिस ने मद्रास हाईकोर्ट को दी है। जस्टिस एमएस रमेश व जस्टिस सुंदर मोहन की खंडपीठ तिरुनेलवेली जिले के तिरुमलाई की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई कर रही है। तिरुमलाई का कहना है कि उसका भाई गणेशन योग केंद्र में धर्मार्थ कार्य कर रहा था। वह दो मार्च, 2023 से लापता है। योग केंद्र की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। हाईकोर्ट ने पुलिस को 8 अप्रैल तक मामले में रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए हैं। अब इस साल शिवरात्रि के बाद इसी फाउंडेशन केंद्र में गया हुआ मंगेश्वर ठाकुर भी लापता हो गया है। जिसकी गुमशुदगी का मामला स्थानीय उडक्कम थाने में दर्ज कराई गई।

क्या है ईशा फाउंडेशन

सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने साल 1983 में अपने 7 साथियों के साथ योग क्लास की शुरुआत की थी। यही आगे चलकर ‘ईशा योग फाउंडेशन’ कहलाया। कोयंबटूर से करीब 30 किलोमीटर दूर वेल्लिंगिरी की पहाड़ी पर स्थित ईशा फाउंडेशन योग के प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां देश-विदेश से हजारों की संख्या में लोग योग, मेडिटेशन और आध्यात्म दर्शन के लिए पहुंचते हैं।ईशा फाउंडेशन करीब 150 एकड़ में फैला है।आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक फाउंडेशन में मुख्य तौर पर योग के 4 प्रमुख आयामों- क्रिया, ज्ञान, भक्ति और कर्म का पठन-पाठन होता है। ईशा फाउंडेशन में भगवान शिव की 112 फिट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसे ‘आदियोगी’ के नाम से भी जाना जाता है। तमाम श्रद्धालु इसकी परिक्रमा भी करते हैं।यह प्रतिमा गिनीज बुक में शामिल है। यह 25 फ़ीट चौड़ी है और ये 500 टन स्टील से बनी है। आपको बता दें कि हर साल महाशिवरात्रि के मौके पर ईशा फाउंडेशन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन होता है, जिसमें हजारों लोग जुटते हैं। इसी मेले में शामिल होने टेकापार का मंगेश्वर ठाकुर गया हुआ था।

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