खाद संकट पर अफसरों का कहना- डी.ए.पी. के विकल्प के रुप में सुपर फास्फेट का कर सकतें हैं इस्तेमाल



बालोद| कलेक्टर श्री जनमेजय महोबे ने कहा कि मौजूदा खरीफ सीजन में जिले के किसानों को किसी भी स्थिति में खाद-बीज की कमी की समस्या से जुझना ना पड़े, इसके लिए समय पूर्व सभी उपाय सुनिश्चित किए जाएॅ। कलेक्टर श्री महोबे जिले में उर्वरक व्यवस्था के संबंध में कृषि, जिला विपणन संघ एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक कल संयुक्त जिला कार्यालय के कलेक्टर कक्ष में ली। उन्होंने कृषि एवं सम्बद्ध विभाग के अधिकारियों को जिले के किसानों को समुचित मात्रा में खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। बैठक में कंपनी एवं राज्य स्तर से उर्वरकों की उपलब्धता की जानकारी ली गई। कलेक्टर ने डबल लाॅक स्तर उपलब्ध उर्वरकों को यथाशीघ्र समितियों में भण्डारण करके समिति स्तर से कृषकों को वितरण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने जिन समितियों में उर्वरक की कमी है, उनमें प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक भण्डारण करने हेतु नोडल अधिकारी, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक को समिति प्रबंधकों के माध्यम से आर.ओ., डी.डी. जारी करने हेतु सख्त निर्देश दिए। कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि सामान्यतः कृषकों द्वारा डी.ए.पी. उर्वरकों की मांग अधिक की जा रही है, जिसकी उपलब्धता के लिए जिला एवं राज्य स्तर पर हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। डी.ए.पी. की विकल्प के रुप में सुपर फास्फेट जिसमें सामान्यतः 16 प्रतिशत स्फूर (फारफोरस) एवं 11 प्रतिशत गंधक होता है, के उपयोग करने हेतु संबंधित अधिकारियों को कृषकों के मध्य तकनीकी प्रचार-प्रसार करने हेतु समझाईश दी गई। उन्होंने बताया कि शासन के दिशा निर्देशों के अनुसार उर्वरकों की गुणवत्ता नियंत्रण, विक्रय हेतु पी.ए.ओ.एस. मशीन की अनिवार्यता एवं निर्धारित दर पर उर्वरकों के विक्रय सुनिश्चित करने संबंध में समीक्षा भी की गई। उप संचालक ने बताया कि जिले के कृषि विकास में हाईयील्डिंग, प्रमाणित एवं हायब्रिड बीजों के कृषकों द्वारा उपयोग के साथ उर्वरकों की खपत में वृद्धि हुई है। मानसून के आगमन के साथ धान, दलहन एवं अन्य फसलों की फसल की बुआई प्रारंभ हो चुकी है, जिसमें अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए कृषकों द्वारा रसायनिक उर्वरकों की पूर्ति सहकारी एवं लायसेंसी निजी विक्रेताओं द्वारा की जाती है। उन्होंने बताया कि खरीफ वर्ष 2022-23 में सहकारिता 37500 मे.टन, निजी 23400 मे.टन कुल 60900 मे.टन का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध सहकारिता क्षेत्र में 29043 मे.टन, (77.45 प्रतिशत) का भण्डारण एवं भण्डारण के विरुद्ध 22941 मे.टन (78.99 प्रतिशत) का वितरण हो चुका है तथा वर्तमान 6102 मे.टन उर्वरक सहकारी समितियों में उपलब्ध है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में 8027 मे.टन (34.3 प्रतिशत) का भण्डारण एवं भण्डारण के विरुद्ध 4306 मे.टन (53.64 प्रतिशत) का वितरण किया गया है, निजी लायसेंसी दुकानों में 3720 मे.टन उर्वरक उपलब्ध है। इस प्रकार सहकारी एवं निजी क्षेत्र में 6192 मे.टन यूरिया, 2247 मे.टन सुपर फास्फेट, 448 मे.टन पोटास, 512 मे.टन डी.ए.पी., 424 मे.टन इफको (12ः32ः16 एन.पी.के.) कुल 9822 मे.टन उर्वरक उपलब्ध है।

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