DAILY BALOD NEWS

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3 साल से बहिष्कृत परिवार को न्याय दिलाने के लिए हिंद सेना ने बढ़ाया हाथ, ज्ञापन सौंपकर की गई कार्रवाई की मांग

बालोद। ग्राम खरथुली के रहने वाले जनार्दन सेन व उनके परिवार वालों ने ग्रामीणों पर सामाजिक बहिष्कार का आरोप लगाया है। इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी है। लेकिन 3 साल बाद भी उक्त परिवार को न्याय नहीं मिला है। इस समस्या को पीड़ित परिवार ने अब हिंद सेना छत्तीसगढ़ के समक्ष रखा है। हिंद सेना छत्तीसगढ़ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तरुण नाथ योगी ने इस मुद्दे पर कलेक्टर के नाम से ज्ञापन सौंपकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। इस ज्ञापन में कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तरुण नाथ योगी ने कहा है कि उक्त परिवार 3 वर्षों से सामाजिक व आर्थिक बहिष्कार झेल रहा है। इस संबंध में 19 नवंबर 2019 को भी कलेक्टर व एसपी दोनों जगह शिकायत की गई है। लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। जनार्दन सेन ने हमारे संगठन से अपने गांव से बहिष्कार को समाप्त करवाने के लिए मदद मांगी है और दोबारा आवेदन सौंपा है। इस आवेदन की प्रतिलिपि गृहमंत्री, मानव अधिकार आयोग सहित अन्य अफसरों को भी भेजी गई है। जनार्दन सेन ने गांव के पंचराम साहू, मूलचंद साहू, ईश्वर ध्रुवे, लोकनाथ साहू, लक्ष्मण वास, सुदामा साहू, निरंजन साहू, मधु ,शंभू साहू, गिरधर साहू व अन्य ग्रामीणों पर ग्रामीण व्यवस्था से बहिष्कार किए जाने की शिकायत की है। अपने विस्तृत आवेदन में जनार्दन ने बताया है कि कई सालों से वे और उनके पूर्वज नाई का काम करते आ रहे हैं। विगत 3 साल से गांव में स्वतंत्र रूप से बंधवा प्रथा से हटकर नाई का व्यवसाय करता रहा है। ग्राम में 27 जून 2018 को नाई के संबंध में गांव में मीटिंग रखा गया। जिसमें उक्त ग्रामीणों द्वारा उन्हें कहा गया कि तुम्हें गांव में नाई का काम करना पड़ेगा तो हमारे हिसाब से चलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अपने हिसाब से काम कर मेहनताना लूंगा। मीटिंग में शपथ पत्र लिखकर दिया कि अगर मुझसे काम नहीं करवाना है तो अन्य नाई से आप लोग कार्य करा सकते हैं। तो मीटिंग में उपस्थित ग्रामीण कहने लगे कि यदि तुम्हें खरथुली में रहना है तो बंधुआ मजदूर के रुप में और हमारे हिसाब से मेहनताना में ही काम करना पड़ेगा, नहीं तो तुम्हें गांव छोड़कर जाना पड़ेगा। वह तुमसे और तुम्हारे परिवार से गांव का कोई व्यक्ति बातचीत नहीं करेगा। दुकानों से तुम्हें सामग्री नहीं मिलेगी। डॉक्टर तुम्हारा इलाज नहीं करेगा, मजदूरी कार्य भी बंद करा देंगे और तुम्हें परिवार सहित गांव से बहिष्कृत कर देंगे। मना करने पर गांव में कोतवाल द्वारा मुनादी कर बहिष्कार करवा दिया गया है। मेरे मौलिक अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। गांव का कोई भी व्यक्ति मेरे परिवार वालों से बातचीत नहीं करता है। अगर कोई बातचीत कर दे तो उनके लिए ₹300 दण्ड का प्रावधान भी किया गया है। मेरे गांव में सेलून दुकान था, उसे भी बंद करा दिया गया है। मैं पूरी तरह से बेरोजगार हूं मैं और मेरा परिवार दर-दर की ठोकरें खा रहा है। गांव में रहकर जीवन जीना दूभर हो गया है। शारीरिक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। सेन समाज के लोगों द्वारा ग्रामीणों से मुलाकात कर इस बहिष्कार के प्रतिबंध को हटाने के लिए निवेदन भी किया गया था। कुछ पदाधिकारियों के साथ बैठकर इस पर चर्चा भी हुई थी लेकिन आज तक इस बहिष्कार को नहीं हटाया गया और मुझसे ग्राम समिति के द्वारा ₹6000 नगद, 21 नारियल व बैठक में उपस्थित सभी लोगों को खारा मीठा का अर्थदंड दिया गया है। मुझसे बातचीत करने वाले गांव के कुछ लोगों से भी 300- 300 रुपये अर्थदंड लिया गया है।

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